संयुक्त राष्ट्र संघ के अंग और कार्य, उद्देश्य, सचिवालय, महासचिव – संयुक्त राष्ट्र संघ नोट्स

संयुक्त राष्ट्र संघ के अंग

संयुक्त राष्ट्र संघ के कुल कितने अंग हैं?

संयुक्त राष्ट्र संघ के कुल 6 हैं  जो आपको टेबल ऑफ़ कंटेंट दिख रहा होगा। आप उस  पर क्लिक करके पढ़ सकते है। 

 

1. महासभा (General Assembly)

• यह संयुक्त राष्ट्र संघ की व्यवस्थापिका सभा है। इसमें सभी सदस्य राष्ट्रों के प्रतिनिधि सम्मिलित हैं।

• प्रत्येक सदस्य राष्ट्र इसमें अधिकतम पाँच प्रतिनिधि भेज सकता है, किन्तु प्रत्येक सदस्य राष्ट्र को एक ही वोट देने का अधिकार होता है।

महासभा शान्ति, नि:शस्त्रीकरण, आर्थिक विकास, परमाणु शक्ति का शान्तिमय उपयोग, सामाजिक प्रगति, मानवीय अधिकार इत्यादि सभी विषयों पर विचार कर सकती है।

• इसकी बैठक वर्ष में एक बार अवश्य होती है। किन्तु सुरक्षा परिषद् के आह्वान पर इसकी आपात बैठक कभी भी बुलाई जा सकती है।

महासभा के प्रतिनिधियों द्वारा एक वर्ष के लिए इसके अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चुनाव होता है।

सुरक्षा परिषद् के 10 अस्थायी सदस्यों का चुनाव महासभा द्वारा ही किया जाता है।

• संयुक्त राष्ट्र संघ का बजट भी महासभा द्वारा पारित किया जाता है और इसी में प्रत्येक सदस्य के योगदान का निर्णय होता है।

• सुरक्षा परिषद् सहित सभी विशेष समितियों के प्रतिवेदन आम सभा के विचार के लिए रखे जाते हैं।

• मुख्य मुद्दों का निर्णय दो-तिहाई मतों की स्वीकृति से और शेष सामान्य बहुमत से स्वीकृत किए जाते हैं।

• महासभा सुरक्षा परिषद् के अस्थायी सदस्यों, आर्थिक तथा सामाजिक परिषद् के सदस्यों और न्यासी परिषद् के निर्वाचित सदस्यों को चुनती है।

• अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के सदस्यों को महासभा और सुरक्षा परिषद् संयुक्त रूप से चुनती है।

2. सुरक्षा परिषद् (Security Council)

• यह संयुक्त राष्ट्र संघ की कार्यपालिका है।

• इसके पाँच स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य हैं।

अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन सुरक्षा (परिषद् के स्थाई सदस्य हैं। अस्थायी सदस्यों को महासभा द्वारा दो वर्ष के लिए सदस्य राष्ट्रों में से चुना जाता है।

• अस्थायी सदस्यों का क्षेत्रीय वितरण निम्न प्रकार है

अफ्रीकी एशियाई -5

लैटिन अमेरिका – 2

पश्चिमी यूरोप एवं अन्य – 2

पूर्वी यूरोप – 1

• महत्त्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लेने के लिए नौ वोटों की आवश्यकता पड़ती है, बशर्ते पाँच स्थायी सदस्यों में से किसी का भी निषेधात्मक वोट न हो।

अधिकार और कार्य

• सुरक्षा परिषद् महासभा के साथ अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीशों को चुनती है।

• यह नये सदस्यों के प्रवेश, पुराने सदस्यों के निष्कासन या निलम्बन और महासचिव (Secretary General) की नियुक्ति की सिफारिश करती है।

सुरक्षा परिषद् संयुक्त राष्ट्रसंघ के उद्देश्यों एवं सिद्धांतों के अनुकूल अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा को बनाये रखने का प्रयास करती है।

सुरक्षा परिषद् में वीटो

वीटो का अर्थ है- निषेधात्मक वोट। सुरक्षा परिषद् के प्रत्येक स्थायी सदस्य को निषेधात्मक मत प्राप्त है।

• किसी भी स्थायी सदस्य के द्वारा इसका प्रयोग करने पर कोई भी प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हो सकता।

• सुरक्षा परिषद् सम्पूर्ण वर्ष अधिवेशन की स्थिति में रहती है।

• अंग्रेजी वर्णमाला के अक्षरों के क्रम से सभी देश एक-एक माह के लिए सुरक्षा परिषद् की अध्यक्षता करते हैं।

सोवियत संघ ने वीटो का उपयोग सबसे अधिक बार किया है।

3. आर्थिक और सामाजिक परिषद् (Economic and Social Council)

• इसमें 54 सदस्य होते हैं जो महासभा द्वारा 3 वर्ष के लिये चुने जाते हैं।

• वह आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा मानवतावादी समस्याओं के लिए किये गए कार्यों की सूचना महासभा को देती है।

उद्देश्य

• महासभा के सत्ताधिकार में संयुक्त राष्ट्र संघ के आर्थिक एवं सामाजिक कार्य-कलापों के लिये उत्तरदायी होना।

• अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, स्वास्थ्य संबंधी एवं शैक्षिक विषयों पर अध्ययन, प्रतिवेदन एवं अभिप्रस्ताव प्रस्तुत करना ।

• जाति, लिंग, भाषा और धर्म का भेद-भाव किये बिना मानव अधिकारों एवं मौलिक स्वाधीनता के लिये सम्मान-भाव की अभिवृद्धि एवं सर्वत्र उनका पालन।

• आर्थिक एवं सामाजिक परिषद् की बैठकें वर्ष में दो बार होती है अप्रैल में न्यूयॉर्क में तथा जुलाई में जेनेवा में।

4. न्यासी परिषद् (Trusteeship Council)

• इस परिषद् के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र का उन राष्ट्रों के प्रशासन एवं सुरक्षा से संबंधित दायित्व स्पष्ट होता है, जो द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद भी स्वतंत्र नहीं हो पाए।

• इसमें वर्तमान में 12 सदस्य हैं, जिनमें चार प्रबन्धकर्ता देश, तीन सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्य होने के कारण स्थायी सदस्य और पाँच निर्वाचित सदस्य हैं।

• इसका प्रमुख कार्य प्रत्येक सदस्य देश की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक उन्नति करना तथा उन्हें विकास की दिशा दिखाना है।

• अंतिम न्यास क्षेत्र पलाऊ द्वारा वर्ष 1994 में स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद न्यास परिषद् के कार्य लगभग समाप्त हो गए हैं।

5. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice)

अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय संयुक्त राष्ट्र संघ का प्रधान न्यायिक अंग है। इसमें 15 न्यायाधीश होते हैं, जिनका निर्वाचन 9 वर्ष की अवधि के लिये महासभा और सुरक्षा परिषद् के सदस्य करते हैं।

● किसी भी सदस्य राष्ट्र से दो न्यायाधीश चुने जाते हैं।

• यदि सदस्य राष्ट्र कोई प्रतिवाद न्यायालय के समक्ष निर्णय के लिए सौंपता है तो इसके निर्णय को उसे मानना पड़ता है।

• महासभा और सुरक्षा परिषद् कानूनी प्रश्नों पर इससे परामर्श ले सकती है।

• सभी विवादों का फैसला न्यायाधीशों के बहुमत के आधार पर होता है। बराबर मत पर अध्यक्ष का मत लिया जाता है।

• न्यायालय के सामने लाये गये प्रश्नों पर उपस्थित न्यायाधीशों के बहुमत द्वारा निर्णय लिया जाता है (कम से कम नौ सदस्य उपस्थित रहने चाहिये)।

● वर्ष 1946 से अब तक अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने अनेक अंतर्राष्ट्रीय विवादों पर 71 निर्णय दिए हैं।

• मुख्य कार्यालय – हेग (नीदरलैण्ड)

• न्यायाधीश अपने में से ही एक अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष को तीन वर्ष के लिए चुनते हैं।

• न्यायालय की सरकारी भाषाएँ फ्रेंच तथा अंग्रेजी हैं।

6. सचिवालय (Secretariat)

• यह संयुक्त राष्ट्र का प्रशासनिक अंग है।

• संयुक्त राष्ट्र संघ के नित्य प्रतिदिन के कार्यों को करने के लिए एक सचिवालय है जिसमें लगभग 10,000 कर्मचारी कार्य करते हैं।

• इसका सबसे बड़ा अधिकारी महासचिव होता है।

• महासचिव की नियुक्ति सुरक्षा परिषद् के अभिप्रस्ताव पर महासभा द्वारा 5 वर्ष के लिये होती है।

महासचिव के कार्य

• यह संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद् का ध्यान ऐसे विषयों की ओर दिलाता है, जिससे उसकी राय में विश्व शान्ति के भंग होने की आशंका हो या सुरक्षा पर खतरे की सम्भावना हो।

• संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यों के सम्बन्ध में यह वार्षिक तथा पूरक प्रतिवेदन महासभा में प्रस्तुत करता है।

• प्रधान कार्यालय – न्यूयॉर्क

• महासचिव – बान की मून (दक्षिण कोरिया) महासचिव की सहायता अवर महासचिव और सहायक महासचिव करते हैं।

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