संसद की विधायी प्रक्रिया – विधायी प्रक्रिया क्या है – विधायी कार्य क्या है

संसद की विधायी प्रक्रिया 

Legislative process of parliament

साधारण विधेयक प्रारूप होता है जो सदन में विधि निर्माण कानून निर्माण हेतु प्रस्ताव किया जाता है कोई भी विधेयक विधि का रूप धारण करता है जब उसे संसद के दोनों सदनों तथा राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हो जाती है

A simple bill is a draft that is proposed to formulate a law making legislation in the House. Any bill takes the form of a law when it receives the approval of both the Houses of Parliament and the President.

नोट जब कोई बिल लाया जाता है तो उसे विधेयक कहते हैं जब विधेयक पास हो जाता है तो वह कानून बन जाता है

Note – When a bill is brought, it is called a bill. When a bill is passed, it becomes a law.

सरकारी विधेयक Government bill

यह विधेयक सरकार के मंत्रियों द्वारा प्रस्तुत किए जाते हैं इनका संबंध आम जनता से भी हो सकता है अथवा किसी विशेष वर्ग संस्था अथवा क्षेत्र से विषय भी है

This bill is presented by the ministers of the government, it can be related to the general public or is related to a particular class institution or area.

संसद की विधायी प्रक्रिया

गैर सरकारी विधेयक  Private government bill

ऐसे विधेयक जो मंत्रियों के द्वारा नहीं बल्कि संसद के किसी अन्य सदस्य द्वारा प्रस्तुत किए जाते हैं यह भी आम जनता विशेष वर्ग संस्था अथवा क्षेत्र से संबंधित हो सकते हैं

Such bills which are introduced not by the ministers but by any other member of the Parliament, may also belong to the general public, a particular class institution or region.

अनुच्छेद 107 – साधारण विधेयक को संसद की किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है

Article 107 General Bill can be introduced in any House of Parliament.

संसद की विधायी प्रक्रिया 

साधारण विधेयक के कानून बनाने की विधायी प्रक्रिया

Law process of law making of ordinary bill

चरण एक= विधेयक का प्रारूप तैयार करना है

Step One is to draft a Bill

चरण 2 प्रस्तुतीकरण एवं प्रथम वाचन

Stage 2 Presentation and First Reading

प्रति सदन की प्रत्येक सदस्य को दे दी जाती

Per member to be given to each member of the House

राज्य पत्र में प्रकाशित कर दिया जाता

Gets published in the state paper

कोई बहस नहीं होती

There is no debate

  • चरण 3 द्वितीय वचन बिल पर बहस होती है
  • Step 3 Second bill is debated
  • चरण 3(i) प्रवर समिति अथवा संयुक्त प्रवर समिति को सौंपने सदन की सदस्यों द्वारा बनाई जाती है
  •  step 3 (i) Handing over to Select Committee or Joint Select Committee is made by the members of the House.
  • चरण 3 . ii प्रवर समिति की रिपोर्ट एवं उस पर सदन में चर्चा संविधान संशोधन इसी के समय
  • step 3 . ii. Select committee report and discussion on it in the House Constitutional amendment at this time

चरण 4 तृतीय वचन  Step 4 Third Word

  • वोटिंग सरकार के पक्ष अथवा विपक्ष में
  • Voting government in favor or opposition
  • चरण 4(i ) एक सदन में विधेयक का पारित होना
  • Step 4 (i) Passing of a Bill in a House
  • चरण 4. ii विधेयक का दूसरे सदन में प्रस्तुतीकरण
  • Step 4. Presentation of the ii bill in the second house

दूसरे सदन में प्रस्तुतीकरण की बाद यह प्रक्रिया दूसरे सदन में चलती है फिर दूसरे सदन से पारित होकर राष्ट्रपति के पास जाता है राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद विधेयक कानून एक्ट बन जाता है

After the presentation in the second house, this process goes on in the second house, then passed from the second house and goes to the President, after the President’s signature, the bill becomes a law act.

दोनों सदनों की संयुक्त बैठक अनुच्छेद 108

Article 108 Joint meeting of both houses

किसी विधेयक पर गतिरोध की स्थिति में संविधान द्वारा संयुक्त बैठक की एक असाधारण व्यवस्था की गई यह निम्नलिखित में से किसी एक परिस्थिति मे बुलाई जाती है जब एक सदन द्वारा विधेयक पारित कर दूसरे सदन में भेजा जाता है

In the event of a deadlock on a bill, an extraordinary arrangement of joint meeting is made by the constitution. It is called in one of the following circumstances when a bill is passed by one house and sent to another house.

i . यदि विधेयक को दूसरे सदन द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया

i. If the bill is rejected by the second house

ii . यदि इस सदन विधेयक में किए गए संशोधनों को मानने से असहमत हो

ii. If this House disagrees with the amendments made in the Bill

iii . दूसरे सदन द्वारा बिना विधेयक के पास किए 6 महीने से अधिक समय हो जाए

iii. It should be more than 6 months without a bill passed by the second house

इसे संवैधानिक गतिरोध कहा जाता है

This is called constitutional deadlock

  • अनुच्छेद 108 संवैधानिक गतिरोध की स्थिति में भारत के राष्ट्रपति संयुक्त बैठक बुलाते हैं
  • Article 108 The President of India calls a joint meeting in the event of a constitutional deadlock.
  • अनुच्छेद 118 संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा का अध्यक्ष करता है
  • Article 118 The joint meeting is presided over by the Speaker of the Lok Sabha.
  • संयुक्त बैठक की संचालन के नियम राष्ट्रपति अध्यक्ष एवं सभापति की सलाह पर बनते हैं
  • Rules of conduct of joint meeting are made on the advice of the President and the Chairman.

अध्यक्षता ______अध्यक्ष= उपाध्यक्ष= उपसभापति

Chairman ______ President = Vice President = Deputy Chairman

नोट – अध्यक्षता सभापति नहीं करता है क्योंकि सभापति कभी किसी सदन का सदस्य नहीं होता है

Note: The Speaker does not preside because the Chairman is never a member of any House.

संयुक्त बैठक उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से पारित होती है

The joint meeting is passed by a majority of the members present and voting.

नोट्स संविधान संशोधन और धन विधेयक में संयुक्त बैठक नहीं बुलाई जाती है

Notes: A joint sitting is not called in the constitution amendment and money bill.

संसद की विधायी प्रक्रिया 

विधेयक/Billवर्ष/The yearप्रधानमंत्री/Prime minister

दहेज प्रतिषेध विधेयक 1959

Dowry Prohibition Bill 1959

1961

जवाहरलाल नेहरू

Jawaharlal Nehru

बैंकिंग सेवा आयोग विधेयक

Banking Services Commission Bill

1978

मोरारजी देसाई

Morarji Desai

आतंकवाद निरोधक अध्यादेश 2002

Anti Terrorism Ordinance 2002

2002

अटल बिहारी वाजपेयी

Atal Bihari Vajpayee

संसद की विधायी प्रक्रिया

साधारण विधेयक/Ordinary billधन विधेयक/Money Bill

1.इसे लोकसभा एवं राज्यसभा में कहीं भी प्रस्तुत किया जा सकता है

It can be presented anywhere in the Lok Sabha and the Rajya Sabha.

2.इसे मंत्री अथवा गैर सरकारी सदस्य दोनों द्वारा प्रस्तुत किया जा सकता है

It can be submitted by both the minister or non-government member.

3.इसे सदन में प्रस्तुत करने से पूर्व राष्ट्रपति की अनुमति आवश्यक नहीं होती है

The President’s permission is not necessary before it is presented in the House.

4.इसे राज्यसभा द्वारा संशोधित या अस्वीकृत किया जा सकता है

It can be amended or rejected by the Rajya Sabha.

5.इसे राज्यसभा द्वारा संशोधित या आस्वीकृत नहीं किया जा सकता है

It cannot be amended or adopted by the Rajya Sabha.

6.इसे राज्यसभा में भेजने के लिए लोकसभा अध्यक्ष के द्वारा प्रमाणित किए जाने की आवश्यकता नहीं होती है

It does not need to be certified by the Speaker of Lok Sabha to be sent to the Rajya Sabha.

7. दोनों सदनों से असहमति की स्थिति में राष्ट्रपति दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुला सकता है इसे दोनों सदनों में पारित होने के बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाता है

In case of disagreement with both the Houses, the President can call a joint sitting of both Houses. It is sent for the President’s signature after it is passed in both Houses.

8.यह लोकसभा में अस्वीकृत होने पर सरकार को त्यागपत्र देना पड़ सकता है

The government may have to resign if it is rejected in the Lok Sabha.

9.इसे राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृत या अस्वीकृत किया जा सकता है अथवा पुनर्विचार के लिए भेजा जा सकता है

It can be approved or rejected by the President or sent for reconsideration.

इसे सिर्फ लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है

It can only be introduced in the Lok Sabha

इसे केवल सरकार के मंत्री द्वारा प्रस्तुत किया जा सकता है

It can only be submitted by the Minister of Government

इसे सदन में राष्ट्रपति की अनुमति से ही पुनः स्थापित किया जा सकता है

It can be reestablished in the House only with the permission of the President.

इसे राज्यसभा अधिकतम 14 दिनों के लिए रोक सकती है

The Rajya Sabha can hold it for a maximum period of 14 days.

इसे लोकसभा अध्यक्ष के द्वारा धन विधेयक के रूप में प्रमाणित किए जाने की आवश्यकता होती है

It needs to be certified as a Money Bill by the Speaker of the Lok Sabha.

इसमें दोनों सदनों के बीच असहमति का कोई असर ही नहीं होता है इसीलिए सयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं है इसे केवल लोकसभा में पारित होने के बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाता है

There is no effect of disagreement between the two houses, so there is no provision for a joint meeting, it is sent only for the signature of the President after it is passed in the Lok Sabha.

यह लोकसभा में अस्वीकृत होने पर सरकार को त्यागपत्र नहीं देना पड़ सकता है

The government may not have to resign if it is rejected in the Lok Sabha.

 

इसी राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृत या अस्वीकृत किया जा सकता है परंतु पुनःविचार के लिए नहीं लौटाया जा सकता है

It can be accepted or rejected by the same President but cannot be returned for reconsideration.

 

 

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संसद की विधायी प्रक्रिया

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