भारत का इतिहास History of India

 भारत का इतिहास  (history of India)

उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में समुद्र तक फैला यह उपमहाद्वीप भारतवर्ष के नाम से ज्ञात है, जिसे महाकाब्य तथा पुराणों में भारतवर्ष अर्थात् ‘भरत का देश’ तथा वहाँ के निवासियों को भारती अर्थात् भरत की संतान कहा गया है। यूनानियों ने भारत को इडिया तथा मध्यकालीन मुस्लिम इतिहासकारों ने हिन्द अथवा हिन्दुस्तान के नाम से संबोधित किया है। भारतीय इतिहास को अध्ययन की सविधा के लिए तीन भागों में बाँटा गया है-प्राचीन भारत, मध्यकालीन भारत एवं आधुनिक भारत।

Spreading from the Himalayas in the north to the sea in the south, this subcontinent is known as Bharatvarsha, which in the Mahakabya and Puranas has been called Bharatvarsha i.e. ‘Bharat’s country’ and the inhabitants there are Bharati i.e. children of Bharat. The Greeks have addressed India as Idea and medieval Muslim historians as Hind or Hindustan. Indian history is divided into three parts for the convenience of study – ancient India, medieval India and modern India.

भारत का इतिहास

History of India

 प्राचीन भारत Ancient India 

1. प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत

1. Sources of ancient Indian history

प्राचीन भारतीय इतिहास के विषय में जानकारी मुख्यतः चार स्रोतों से प्राप्त होती है

Information about ancient Indian history is mainly obtained from four sources.

1.धर्मग्रंथ

1. Theology

2.ऐतिहासिक ग्रंथ

2.Historical Texts

3.विदेशियों का विवरण

3. Details of foreigners

4.पुरातत्व संबंधी साक्ष्य

4. Evidence regarding serenity

भारत का इतिहास

History of India

 

धर्मग्रंथ एवं ऐतिहासिक ग्रंथ से मिलनेवाली महत्वपूर्ण जानकारी

Important information from religious and historical texts

  • भारत का सर्वप्राचीन धर्मग्रंथ वेद है, जिसके संकलनकर्ता महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास को माना जाता है। वेद चार ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद एवं अथर्ववेद ।
  • The most ancient scripture of India is the Veda, which is compiled by Maharishi The Krishnadvapayana Vedavyas are considered. Vedas Four Rigveda, Yajurveda, Samveda and Atharvaveda.

  ऋचाओं  (Riches)

  • ऋचाओं के क्रमबद्ध ज्ञान के संग्रह को ऋग्वेद कहा जाता है।इसमें 10 मंडल, 1028 सूक्त (वालखिल्य पाठ के सूको सहित) एवं 10,462 ऋचाएँ हैं। इस वेद के ऋचाओं के पढ़ने वाले ऋषि को होत कहते हैं। इस वेद से आर्य के राजनीतिक प्रणाली एवं इतिहास के बारे में जानकारी मिलती है।
  • The collection of systematic knowledge of the Rithas is called Rigveda. It consists of 10 mandalas, 1028 Suktas (including Sukko of Valakhilya text) and 10,462 Rithas. The sage who reads the Rithas of this Veda is called Hota. This Veda provides information about Arya’s political system and history.
  • विश्वामित्र द्वारा रचित ऋग्वेद के तीसरे मंडल में सूर्य देवता सावित्री को समर्पित प्रसिद्ध गायत्री मंत्र है। इसके 9वें मंडल में देवता सोम का उल्लेख है।
  • The third mandala of the Rig Veda composed by Vishwamitra contains the famous Gayatri Mantra dedicated to the sun god Savitri. Its 9th mandala mentions the deity Som.
  • इसके 8वें मंडल की हस्तलिखित ऋचाओं को खिल कहा जाता है।
  • The handwritten hymns of its 8th mandala are called khil.
  • चातुष्वर्य समाज की कल्पना का आदि स्रोत ऋग्वेद के 10वें मंडल में वर्णित पुरुषसूक्त है, जिसके अनुसार चार वर्ण (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य तथा शूद्र) आदि पुरुष ब्रह्मा के क्रमशः मुख, भुजाओं, जंघाओं और चरणों से उत्पन्न हुए।
  • The initial source of imagination of the Chatushvarya society is the Purushasukta mentioned in the 10th mandala of the Rigveda, according to which the four Varnas (Brahmins, Kshatriyas, Vaishyas and Shudras) etc. originated from the mouth, arms, thighs and feet of Brahma respectively.
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नोट: धर्मसूत्र चार प्रमुख जातियों की स्थितियों, व्यवसायों, दायित्वों, कर्तव्यों तथा विशेषाधिकारों में स्पष्ट विभेद करता है।

Note: The Dharmasutra makes a clear distinction between the positions, occupations, obligations, duties and privileges of the four major castes.

ईसा पूर्व एवं ईसवी  (BC and AD)

वर्तमान में प्रचलित ग्रेगोरियन कैलेंडर (ईसाई कैलेंडर/जूलियन कैलेंडर) ईसाई धर्मगुरु ईसा मसीह के जन्म वर्ष (कल्पित) ‘ है। ईसा मसीह के जन्म के पहले के समय को ईसा पूर्व (B.C.-Before the birth or jesus Chirst) कहा जाता है। ईसा पूर्व में वर्षों की गिनती उल्टी दिशा में होती है, जैसे महात्मा बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में एवं मृत्यु 483 ईसा पूर्व में हुआ। यानी ईसा मसीह के जन्म के 563 वर्ष पूर्व महात्मा बुद्ध का जन्म एवं 483 वर्ष पूर्व मृत्यु हुई।

The currently prevailing Gregorian calendar (Christian calendar / Julian calendar) is the birth year (fictitious) ‘of the Christian god Jesus Christ. The time before the birth of Christ is called B.C.-Before the birth or jesus Chirst. Years in BC are counted in reverse direction, like Mahatma Buddha was born in 563 BC and death in 483 BC. That is, Mahatma Buddha was born 563 years before the birth of Christ and died 483 years ago.

ईसा मसीह की जन्म तिथि से आरंभ हुआ सन्, ईसवी सन् कहलाता 6. इसके लिए संक्षेप में ई.लिखा जाता है। ई. को लैटिन भाषा के शब्द A.D. में भी लिखा जाता है। A.D. यानी Anno Domini का शाब्दक अर्थ है- Inthe vear of lord Jesus Chirst)

The year commenced from the date of birth of Christ, is called AD 6. For this, E. is written briefly. E. to Latin language word A.D. It is also written in A.D. That is, Anno Domini literally means – Inthe vear of lord Jesus Chirst)

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  • वामनावतार के तीन पगों के आख्यान का प्राचीनतम स्रोत ऋग्वेद है। – ग्वेद में इन्द्र के लिए 250 तथा अग्नि के लिए 200 अचाओं कीरचना की गयी है।

  • The earliest source of the narrative of the three pagas of Vamnavatar is the Rigveda. – 250 Indra and 200 fire for fire have been created in Indra.

  • नोट: प्राचीन इतिहास के साधन के रूप में वैदिक साहित्य में अग्वेद के बाद शतपथ ब्राह्मण का स्थान है।

  • Note: In Vedic literature as a means of ancient history, Shatapatha Brahmin is the place after Agaveda.

  • यजुर्वेद – सस्वर पाठ के लिए मंत्रों तथा बलि के समय अनुपालन के लिए नियमों का संकलन यजर्वेद कहलाता है। इसके पाठकर्ता कोअध्ययु कहते है।

  • Yajurveda – Compilation of mantras for recitation and rules for compliance at the time of sacrifice is called Yajurveda. Its reader is called Adhyayu.

  • यह एक ऐसा वेद है जो गय एवं पथ दोनों में है।

  • It is a Veda which is both in the Gayas and the Paths.

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सामवेद  Samved 👉🙏इन्हे भी पढ़े पुनर्जागरण-gk-question-answer

सामवेद – यह गायी जा सकने वाली ऋचाओं का संकलन है। इसके पाठकर्ताको उद्रातृ कहते हैं।

Samaveda – This is a collection of verses that can be sung. Its reader is called Udratri.

  • इसे भारतीय संगीत का जनक कहा जाता है।
  • It is called the father of Indian music.

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 अथर्ववेद Atharvaveda

पुराण संबंधित बंश       –    Mythology
विष्णु पुराण मौर्य वंश    –     Vishnu Purana Maurya Dynasty
मत्स्य पुराण आन्न सातवाहन –  Matsya Purana Annah Satavahana
वायु पुराण गुप्त वंश        – Vayu Purana Gupta Dynasty

अथर्वा ऋषि द्वारा रचित इस वे में रोग, निवारण, तंत्र मंत्र, जादू: टोना, शाप, वशीकरण,मत्स्य पुराण आशीर्वाद, स्तुति, प्रायश्चित, वायु पुराण औषधि, अनुसंधान, विवाह, प्रेम, राजकर्म, मातृभूमि-महात्मय आदि विविध विषयों से संबद्धमंत्र तथा सामान्य मनुष्यों के विचारों, विश्वासों, अंधविश्वासों इत्यादिका वर्णन है। अथर्ववेद कन्याओं के जन्म की निन्दा करता है।

In Disease, Prevention, Tantra Mantra, Magic: Witchcraft, Curse, Vashikaran, Matsya Purana Blessings, Praise, Atonement, Vayu Purana medicine, Research, Marriage, Love, Rajkarma, Motherland-Mahatmya etc. Mantras related to various topics and ideas of ordinary human beings , Beliefs, superstitions etc.
Is a description of. The Atharvaveda condemns the birth of girls. 

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  • इसमें सभा एवं समिति को प्रजापति की दो पुत्रियों कहा गया है।

    In this, the assembly and the committee have been called the two daughters of Prajapati.

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  • नोट: सबसे प्राचीन वेद ऋग्वेद एवं सबसे बाद का वे अथर्ववेद है। 

Note: The oldest Veda is the Rig Veda and the later Veda is the Atharvaveda.

  • वेदों को भली-भाँति समझने के लिए छह वेदांगों की रचना हुई। ये हैं-शिक्षा, ज्योतिष, कल्प, व्याकरण, निरूक्त तथा छंद

To understand Vedas well, six Vedangas were composed. These are education, astrology, kalpa, grammar, nirukta and verses

  • भारतीय ऐतिहासिक कथाओं का सबसे अच्छा क्रमबद्ध विवरण पुराणों में मिलता है। इसके रचयिता लोमहर्ष अथवा इनके पुत्र उग्रश्रवा माने जाते हैं। इनकी संख्या 18 है, जिनमें से केवल पाँच–मल्य, वायु, विष्णु, ब्राह्मण एवं भागवत में ही राजाओं की वंशावली पायी जाती है।

Best Sort Description of Indian Historical Stories It is found in the Puranas. Its author Lomharsha or his son is considered Ugrashrawa. Their number is 18, out of which only five – Malya, Vayu, Vishnu, Brahmin and Bhagwat – are found in the lineage of kings.

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नोट : पुराणों में मत्स्यपुराण सबसे प्राचीन एवं प्रामाणिक है। 

Note: Among the Puranas, Matsyapurana is the most ancient and authentic.

  • अधिकतर पुराण सरल संस्कृत श्लोक में लिखे गये हैं। स्त्रियों तथा शूद्र जिन्हें वेद पढ़ने की अनुमति नहीं थी, वे भी पुराण सुन सकते थे। पुराणों का पाठ पुजारी मंदिरों में किया करते थे।

– Most of the Puranas are written in simple Sanskrit shloka. Women And Shudras who were not allowed to read Vedas also listen to Puranas. Could Puranas were recited in priestly temples.

  • स्मृतिग्रंथों में सबसे प्राचीन एवं प्रामाणिक मनुस्मृति मानी जाती है। यह शुंग काल का मानक ग्रंथ है। नारद स्मृति गुप्त युग केविषय में जानकारी प्रदान करता है।

The most fallen position of a woman is obtained from the Maitreyani Samhita. In which, like gambling and alcohol, the woman is said to be the third main defect of the man. In the Shatapatha Brahmin, the woman is called the ardhagini of the man.

  • जातक में बुद्ध की पूर्वजन्म की कहानी वर्णित है। हीनयान का प्रमुख ग्रंथ ‘कथावस्तु’ है, जिसमें महात्मा बुद्ध का जीवन-चरित अनेक कथानकों के साथ वर्णित है

Jataka describes the story of Buddha’s previous birth. Inferior
The major text is ‘Kathavastu’, in which the life-story of Mahatma Buddha is described with many stories.

जैन साहितय को आगम कहा जाता हैं जैनधर्म का प्राराम्भिक इतिहास ‘कल्पसूत्र से ज्ञात होता हे /।जैन गंथ भगवती सूत्र में महावीर के जीवन-कत्यों तथा अन्य समकालिकों के साथ उनके  संबंधों का विवरण मिलता है। –

Jain literature is called Agam. The early history of Jainism is known from ‘Kalpasutra’. Details of relationships are found. –

अर्थशास्त्र के लेखक चाणक्य (कौटिल्या या विष्णुगुप्त) है। यह 15 अधिकरणों एवं 180प्रकरणों में विभाजित है। इससे भौर्यकालीन इतिहास की जानकारी प्राप्त होती है

The author of Arthashastra is Chanakya (Kautilya or Vishnugupta). It is divided into 15 tribunals and 180 cases. It provides information about the history of the day.

संस्कृत साहित्य में ऐतिहासिक घटनाओं को क्रमबद्ध लिखने का सर्वप्रथम प्रयास करण के द्वारा किया गया। कल्हण द्वारा रचित पुस्तक राजतरंगिणी है, जिसका संबंध  कश्मीर   के इतिहास से है।

The first attempt to write historical events in Sanskrit literature was done by Karan. The book by Kalhan is Rajatarangini, which is related to the history of Kashmir..

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अरबों की सिंथ-विजय का वृत्तांत वचनामा लेखक-आली अहमव) में सुरक्षित है।

The account of the synth-victory of the Arabs is safe in Vachnama writer-Aali Ahamava).

अष्टाध्यायी (संस्कृत भाषा व्याकरण की प्रथम पुस्तक) के लेखक पाणिनि है। इससे मौर्य के पहले का इतिहास तथा मौर्ययुगीनराजनीतिक अवस्था की जानकारी प्राप्त होती है।

Author of Ashtadhyayi (First Book of Sanskrit Language Grammar) It is Panini. This gives information about the history of the pre-Mauryan period and the political phase of the Mauryan era.

कत्वायन की गार्गी संहिता एक ज्योतिष गंध है, फिर भी इसमें भारत पर होने वाले यवन आक्रमण का उल्लेख मिलता है। – पतंजलि पुष्यमित्र शुंग के पुरोहित ये इनके महाभाष्य से शुंगों केइतिहास का पता चलता है।

Gargi Samhita of Katavayan is an astrological smell, yet it mentions the Yavana invasion of India. – The priest of Patanjali Pushyamitra Sunga reveals the history of the Sungas by his great-grandmother.

विवेशी यात्रियों से मिलने वाली प्रमुख जानकारी

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Key information from foreign travelers

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A.यूनानी-ोमन लेखक

A. Greek-Roman writer

1.टेटियस  यह ईरान का रागया था। भारत के संबंध में इसका विवरण आश्चर्यजनक कहानियों से परिपूर्ण होने के कारण

1.Desius It was the Ragaya of Iran. Its description in relation to India is full of amazing stories

2.हेरोडोटस इसे इतिहास का पिता’ कहा जाता है। इसने अपनी पुस्तक हिस्टोरिका में 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व के भारत फारस के संबंध का वर्णन किया है। परन्तु इसका विवरण भी अनुभुतियों एवं अफवाहों पर आधारित है।

2.Herodotus is called the ‘father of history’. It describes the relation of India to Persia of the 5th century BC in his book Historica. But its description is also based on experiences and rumors.

3. सिकन्दर के साथ आनेवाले लेखकों में निर्याकस, आनसिकटरा तथा आस्ट्रिोनस के विवरण अधिक प्रामाणिक एवं विश्वसनीय हैं।

3. Among the authors who come with Alexander, the descriptions of Nirapakas, Anasikatra and Astronas are more authentic and reliable.

4. मेगास्थनीज यह सेल्युकस निकेटर का राजदूत था. जो चन्द्रगुप्त मौर्य के राजवरचार में आया था। इसने अपनी पुस्तक ईग्डिका में मौर्य युगीन समाज एवं संस्कृति के विषय में लिखा है।

4. Megasthenes This was the ambassador of Seleucus Nicator. Who came under the coronation of Chandragupta Maurya. It has written about Mauryan era society and culture in his book Igdika.

5. डार्मिकन यह सीरियन नरेश आन्तियोकस का राजदूत या,जो बिन्दुसार के राजदरबार में आया था। इसका विवरण भी मौर्य युग से संबंधित है।

5. Dirmikran This was the ambassador of the Syrian king Antiochus, who came to the court of Bindusara. Its description is also related to the Mauryan era.

6. डायोनिसियम या मिस नरेश टॉलमी फिडेल्फस का राजदूत था, जो अशोक के राजदरबार में आया था।

6. Dionysium or Miss Naresh Ptolemy was the ambassador of Fidelphus, who came to Ashoka’s court.

7. टॉलमी इसने दूसरी शताब्दी में भारत का भूगोल नामक पुस्तक लिखी।

7. Ptolemy wrote a book called Geography of India in the second century.

8. लिपनी इसने प्रथम शताब्दी में नेचुरल हिस्ट्री नामक पुस्तक लिखी। इसमें भारतीय पशुओं, पेड़ पौधों, खनिज पदार्थों आदि के बारे में विवरण मिलता है।

8. Lipni It wrote a book called Natural History in the first century. In this, details about Indian animals, plants, minerals, etc. are found.

9. पेरीस ऑफ द इस्यियन-सी: इस पुस्तक के लेखक के बारे में जानकारी नहीं है। यह खक करीब 80 ई. में हिन्द महासागर की यात्रा पर आया था। इसने उस समय के भारत के बन्दरगाहों तथा व्यापारिक वस्तुओं के बारे में जानकारी दी है।

9. Peris of the Christian-C: The author of this book is not known. This khak came on a journey of the Indian Ocean in about 80 AD. It has given information about the ports and merchandise of India of that time.

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B. चीनी लेखक   Chinese writer

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1. फाहियान यह चीनी यात्री गुप्त नरेश चन्द्रगुप्त द्वितीय के दरबार में आया था। इसने अपने विवरण में मध्यप्रदेश के समाज एवं संस्कृति के बारे में वर्णन किया है। इसने मध्यप्रदेश की जनता को सुखी एवं समृद्ध बताया है।

1. Fahian, the Chinese traveler, the court of the Gupta King Chandragupta II Came in It has described the society and culture of Madhya Pradesh in its description. It has described the people of Madhya Pradesh as happy and prosperous.

2. संयुमन यह 518 ई. में भारत आया। इसने अपने तीन को यात्रा में बौद्ध धर्म की प्राप्तियाँ एकत्रित की।

2. Samyuman It came to India in 518 AD. It collected the attainments of Buddhism in its three journeys.

3. हेनसांग यह हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आया था। 629 ई. में चीन से भारतवर्ष के लिए प्रस्थान किया और लग एक वर्ष की यात्रा के बाद सर्वप्रथम वह भारतीय राज्य कति पहुँचा। भारत में 15 वर्षों तक ठहरकर 645 ई. में चीन गया।

3. Hensang It came to India during the reign of Harshavardhana. Departed from China for India in 629 AD and after a journey of a year, he reached the Indian state of Kati. He stayed in India for 15 years and went to China in 645 AD.

वह बिहार में नालंदा जिला स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन करने तथा भारत से बौद्ध ग्रथा का एकत्र कर ले जाने लिए आया था।

He came to study at Nalanda University in Nalanda District in Bihar and collected Buddhist texts from India.

इसका भ्रमण वृत्तांत सि -यू -की नाम से प्रसिद्ध जिसमें 138 देशों का विवरण मिलता है। इसने हर्षकालीन समाज धर्म तथा राजनीति के बारे में वर्णन किया है। इसके अनुसार सिन्ध का राजा शूद्र था।

Its travelogue is famous by the name of Si-u-ki which gives details of 138 countries. It has described the religion and politics of the happy society. According to this the king of Sindh was Shudra.

नॉट -हेनसांग के अध्ययन के समय नालदा विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य शीलभद्र थे।

The Vice Chancellor of Nalada University was Acharya Shilabhadra at the time of the study of Not-Hansang.

4. इत्सिंग यह 7वीं शताब्दी के अन्त में भारत आया। इसने अपने विवरण में नालंदा विश्वविद्यालय, विक्रमशिला विश्वविद्यालय तथा अपने समय के भारत को वर्णन किया है।

Etsing It came to India in the late 7th century. It has described Nalanda University, Vikramashila University and India of its time in its description.

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अरबी लेखक  Arabic writer 

  1. अलबरूनी यह महमूद गजनवी के साथ भारत आया था। अरबी में लिखी गई उसकी कृति ‘किताब-उल-हिन्द या तहकीक-ए-हिन्द (भारत की खोज)’ 

Alberuni came to India with Mahmud Ghaznavi. His work ‘Kitab-ul-Hind or Tehkiq-e-Hind (Search of India) written in Arabic’

आज भी इतिहासकारों के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत है। यह एक विस्तृत ग्रंथ है जो धर्म और दर्शन, त्योहारों, खगोल विज्ञान, कीमिया, रीति-रिवाजों तथा प्रयाओं सामाजिक जीवन, भार तौल तथा मापन विधियों, पूर्तिकला कानून, मापतंत्र विज्ञान आदि विषयों के आधार पर अस्सी अध्यायों में विभाजित है।

It is still an important source for historians. It is a comprehensive treatise divided into eighty chapters on the basis of topics of religion and philosophy, festivals, astronomy, alchemy, customs and practices, social life, weight and measurement methods, Purtikala law, Mapology.

इसमें राजपूत कालीन समाज, धर्म, रीति-रिवाज, राजनीति आदि पर सुन्दर प्रकाश डाला गया है।

In it, a beautiful light has been thrown on the Rajput carpet society, religion, customs, politics etc.

2. इब्न बतूता – इसके द्वारा अरबी भाषा में लिखा गया उसका यात्रावृतांत जिसे रिहला कहा जाता है

Ibn Battuta – his travelogue written in Arabic language called Rihla

14वीं शताब्दी में भारतीय उपमहाद्वीप के सामाजिक तथा सांस्कतिक जीवन के विषय म बहुत ही प्रचुर तथा सबसे रोचक जानकारियाँ देता है।

Gives very abundant and most interesting information about the social and cultural life of the Indian subcontinent in the 14th century.

1333 ई में दिल्ली पहुँचने पर इसकी विद्वता से प्रभावित होकर सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक ने उसे दिल्ली का काजी या न्यायाधान नियुक्त किया।

On reaching Delhi in 1333 AD, influenced by its scholarship, Sultan Muhammad bin Tughluq appointed him the Qazi or Tribunal of Delhi. 

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अन्य लेखक Other authors 

1.तारानाथ यह एक तिब्बती लेखक था। इसने कंग्युर तथा तंग्युर नामक ग्रंथ की रचना की। इनसे भारतीय इतिहास है। बारे में जानकारी मिलती है।

1. Taranath It was a Tibetan writer. He composed a book called Kangyur and Tangyur. They have Indian history. Get information about

2. मार्कोपोलो यह 13वीं शताब्दी के अन्त में पाण्ड्य देश की यात्रा पर आया था। इसका विवरण पाण्ड्य इतिहास के अध्ययन के
लिए उपयोगी है।

2. Marcopolo came to visit the Pandya country at the end of the 13th century. Details of the study of Pandya history
Is useful for.

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पुरातत्व संबंधी साक्ष्य से मिलने वाली जानकारी

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Archaeological information

1400 ईसा पूर्व के अभिलेख ‘बोगाज-कोई’ (एशिया माइनर) से वैदिक देवता मित्र, वरुण, इन्द्र और नासत्य (अश्विनी कुमार) के नाम मिलते हैं।

The names of Vedic deities Mitra, Varuna, Indra and Nasatya (Ashwini Kumar) are found from the inscription ‘Bogaj-Koi’ (Asia Minor) dated to 1400 BC.

मध्य भारत में भागवत धर्म विकसित होने का प्रमाण यवन राजदूत ‘होलियोडोरस’ के वेसनगर (विदिशा) गरुड़ स्तम्भ लेख से प्राप्त होता है।

Evidence of the evolution of the Bhagavata religion in Central India is found in the article Vesanagar (Vidisha) Garuda Stambha of Yavana Ambassador ‘Holiodorus’.

सर्वप्रथम भारत वर्ष’ का जिक्र हाथीगुम्फा अभिलेख में है। सर्वप्रथम दुर्भिक्ष का जानकारी देनेवाला अभिलेख सौहगौरा अभिलेख है।

The first mention of Bharatvarsha is in the Hathigumpha inscription. The first record giving information about the famine is the Sauhgaura inscription.

सर्वप्रथम भारत पर होने वाले हूण आक्रमण की जानकारी भीतरी स्तंभ लेख से प्राप्त होती है।

The first information about the Hun invasion of India is obtained from the inner column article.

सती प्रथा का पहला लिखित साक्ष्य एरण अभिलेख (शासक भानुगुप्त) से प्राप्त होती है।

The first written evidence of Sati practice comes from the Eran inscription (ruler | Bhanugupta).

रेशम बुनकर की श्रेणियों की जानकारी मंदसौर अभिलेख से प्राप्त होती है।

Information about the categories of silk weavers is obtained from the Mandsaur inscription.

कश्मीरी नवपाषाणिक पुरास्थल बुर्जहोम से गर्तावास (गहा घर) का साक्ष्य मिला है। इनमें उतरने के लिए सीढ़ियाँ होती थी। –

Evidence of the garbat (gha ghar) has been found from the Kashmiri neolithic archaeological site Burjholm. They had stairs to descend. –

प्राचीनतम सिक्कों को आहत सिक्के कहा जाता है, इसी को साहित्य में कायार्पण कहा गया है।

The oldest coins are called hurt coins, the same has been called literature in literature

सर्वप्रथम सिक्कों पर लेख लिखने का कार्य यवन शासकों ने किया।

The Yavan rulers first did the work of writing articles on coins.

समुद्रगुप्त की वीणा बजाती हुई मुद्रा वाले सिक्के से उसके संगीत प्रेमी होने का प्रमाण मिलता है।

Samudragupta’s coin playing currency playing hartal shows his love for music.

अरिकमेडू (पुदुचेरी के निकट) से रोमन सिक्के प्राप्त हुए हैं।

Roman coins have been received from Arikamedu (near Puducherry).

नोट: सबसे पहले भारत के संबंध बर्मा (सुवर्णभूमि वर्तमान में म्यांमार),मलाया (स्वर्णद्वीप), कंबोडिया (कंबोज) और जावा (यवद्वीप) से स्थापित हुए।

Note: First India’s relations were established with Burma (present day Myanmar), Malaya (Swarnadweep), Cambodia (Cambos) and Java (Yavadweep).

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महत्वपूर्ण अभिलेख Important record

अभिलेख शासक Record ruler

अभिलेख हाथीगुम्फा अभिलेख (तिथि रहित अभिलेख) -कलिंग राज खारवेल

Records Hathigumpha Records (Dateless Records) – Kalinga Raj Kharavel

जूनागढ़ (गिरनार)- अभिलेख रुद्रदामन

Junagadh (Girnar) – Records Rudradaman

नासिक अभिलेख -गौतमी बलश्री

Nashik Records – Gautami Balashree

प्रयाग स्तम्भ लेख- समुद्रगुप्त 

Prayag column article – Samudragupta

ऐहोल अभिलेख -पुलकेशिन-II

Aihole Inscription – Pulakeshin-II

मन्दसौर अभिलेख -मालवा नरेश यशोवर्मन

Mandsaur inscription – Malwa Naresh Yashovarman

ग्वालियर अभिलेख -प्रतिहार नरेश भोज

Gwalior inscription – perish Naresh Bhoj

देवड़ा अपाभिलेख -बंगाल शासक विजयसेन

Deora Apocalypse – Bengali ruler Vijayasena

नोट: अभिलेखों का अध्ययन इपीग्राफी कहलाता है।

Note: Study of records is called epigraphy.

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